Rishikesh

योग भूमि के नाम प्रचलित Rishikesh वाकई में देश-विदेश के ऋषि मुनियों के योग और तप के लिए उचित स्थान हमेसा से रहा है, इसी के चलते कई महान ऋषियों ने अपनी तपस्या में कई वर्ष ऋषिकेश में गुजारे हैं। ऋषिकेश में आज भी कई चर्चित आश्रम आज भी मौजूद हैं जहाँ आज भी लाखों योगी और श्रद्धालु भारत से नहीं अपितु विभिन देशों से योग तथा दर्शन करने आते हैं। Rishikesh के आश्रमों में एक अजीब सुखद सी शांति का अनुभव करने को मिलता है, जो यहाँ आये पर्यटक या श्रद्धालुओं को एहसास करता है की क्यों ऋषिकेश को भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। समुद्र तल से लगभग 1360 फ़ीट की ऊंचाई में बसा Rishikesh City तीर्थ स्थलों का मुख्य द्वार भी माना जाता है।  देवभूमि उत्तराखंड में स्थित चार धाम (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, और यमनोत्री) को भारतीय नहीं जानता, बतौर हिन्दू जीवन में एक बार चार धाम दर्शन की इच्छा सभी की होती है। इन्ही पवित्र चार धाम का प्रवेश द्वार भी ऋषिकेश ही माना जाता है। ऋषिकेश ही वह जगह है जहाँ गंगा अपने विकराल रूप को त्याग का शान्ति से मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है।

Rishikesh

 

ऋषिकेश की विशेषताएं

ऋषिकेश की सबसे बड़ी विशेषता तो यही है की हिमालय, देवभूमि, और उत्तराखण्ड में चार धाम का प्रवेश द्वार ऋषिकेश को ही माना जाता है। इसके अलावा ऋषिकेश उत्तराखण्ड का एक मात्र ऐसा शहर है जो एक साथ तीन जिलों का हिस्सा है। टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, और देहरादून, ऋषिकेश में

 

Rishikesh

देहरादून से ऋषिकेश की दूरी

ऋषिकेश देहरादून से 43 किमी (NH 7) की दूरी पर है जिसे महज 45-50 मिनट में तय किया जा सकता है। वहीँ अगर हरिद्वार से ऋषिकेश की दूरी की बात करें तो वो हैं 24 किमी (NH 34)

How to Reach Rishikesh

Rishikesh Trip प्लान कर रहे हो तो ये बेहद आसान है। अपनी सुविधा और बजट को ध्यान में रख कर रास्ता चुन सकते हो। Rishikesh Trip के लिए तीनो रास्ते मौजूद हैं, हवाई रास्ता, बाई रोड, या फिर ट्रैन से भी आप ऋषिकेश पहुंच सकते हो।

Rishikesh Trip by Road

अपनी पर्सनल गाड़ी से Rishikesh Trip के लिए तो कई रास्ते हो सकते हैं, जिसके लिए गूगल मैप मदद करेगा। लेकिन अगर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आने का प्लान करोगे तो ये देखना बेहद जरुरी हैं की आप किस शहर से आ रहे हो। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश जैसे पडोसी राज्यों के शहर से तो कोई दिक्कत नहीं अधिकांश शहर से डायरेक्ट बस की सुविधा है। लेकिन अगर कोई इनके अलावा पूर्वी, दक्षिणी, और पश्चमी राज्यों से आना चाहेंगे तो वो लोग हरिद्वार की बस ले सकते हैं। इसके बाद हरिद्वार से बस, टैक्सी, और ऑटो कुछ भी लेके ऋषिकेश पहुंच सकते हैं। बस ऑनलाइन बुकिंग व चेकिंग यहाँ करें

Trip to Rishikesh by Train

वैसे तो ऋषिकेश का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश में ही है (RKSH) जहाँ अभी तक लाबी दूरी वाली ट्रैन नहीं संचालित होती थी मगर अब योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को विश्व स्तरीय रेलवेस्टेशन बना कर यहाँ से भी लम्बी दूरी वाली रेल गाड़ियां संचालित होने लगी हैं। इस से पहले लम्बी दूरी वाली ट्रेने Haridwar railway station (HW) तक ही आ पति थी। अब ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से लम्बी दूरी वाली ट्रैन में से मुख्य ट्रेने हैं जम्बू तवी एक्सप्रेस, प्रयाग राज, उदयपुर सिटी, और हावड़ा एक्सप्रेस। जम्बू तवी सप्ताह में एक दिन और प्रयाग राज सप्ताह में तीन दिन चलेगी।

हवाई जहाज से

ऋषिकेश से सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है, जोकि ऋषिकेश से 21 किमी की दूरी पर है। जॉली ग्रांट हवाई अड्डे में दिल्ली व लखनऊ से डायरेक्ट जहाज उपलब्ध हैं। जॉलीग्रांट हवाई अड्डा पहुंच कर यहाँ से आपको बस व ऑटो उपलब्ध हो जायेंगे।

ऋषिकेश में ठहरने की व्यव्श्था

ऋषिकेश में ठहरने के लिए कोई दिक्कत नहीं है। सस्ते गेस्ट हाउस से लेके मेहेंगा 5 Star लेबल Hotel Ananda हैं जहाँ रुकने की उचित व्यवश्था मौजूद है, जिन्हे आप ऑनलाइन भी बुक करा सकते हैं।

मुख्य पर्यटक स्थल

योग नगरी ऋषिकेश योग और तप के साथ साथ पर्यटक की दृष्टि से भी एक भारतीय व दुनिया भर से सैलानियों के लिए ड्रीम स्पॉट है। यहाँ साल भारत के कोने कोने व दुनिया भर से योग का प्रशिक्षण हेतु शिक्षार्थियों की सैलानियों की भीड़ लगी रहती है। एडवेंचर पसंद लोगो के लिए ऋषिकेश में भर भर के एडवेंचर है। रिवर राफ्टिंग, रॉक क्लाइमिंग, हॉट एयर बलून, बंगी जंपिंग जैसे बहुत से एडवेंचर एक्टिविटी के लिए ऋषिकेश जैसी उचित जगह कोई नहीं।

Shivpuri (शिवपुरी)

शिवपुरी का अर्थ है, शिव का घर यहाँ हिन्दू आराध्य भगवान शिव के कई छोटे छोटे मंदिर के कारण यहाँ का नाम शिवपुरी है। मेन ऋषिकेश से 16 किमी की दूरी पर एक छोटा सा गाऊँ है जो गंगा के तट पर स्थित है। यहाँ Adventure Lover के लिए रिवर राफ्टिंग और बहुत कुछ उपलब्ध है। शिवपुरी से ऋषिकेश तक राफ्टिंग करने के साथ-साथ शिवपुरी में ही रात को कैंपिंग के लिए सुन्दर जगह हैं। गंगा के किनारे कैंप में रात्रि विश्राम का आनंद स्वर्ग की अनुभूति करना जैसा है।

Triveni Ghat Rishikesh

Triveni Ghat

योग नगरी ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट एक बहुत ही पवित्र और धार्मिक स्थल है जहाँ श्रद्धालुओं और पर्यटक की भीड़ साल भर हर मौसम में लगा रहता हैं। त्रिवेणी घाट यहाँ का नाम इसलिए है, क्योंकि यहाँ तीन पवित्र नदियों का संगम है गंगा, यमुना, और सरस्वती। ज्यादातर लोग इस स्थान को केवल माँ गंगा का घाट समझते है नाम त्रिवेणी घाट जान कर भी किसी के मन में जिज्ञांसा नहीं होती की किन किन नदियों का संगम हैं। इसमें उत्तराखण्ड सरकार और उत्तराखण्ड के निवासियों की नाकामी ही हैं की इसका प्रचार ठीक से नहीं हो पाता जितना की होना चाहिए था। टॉपिक पर वापस आएं तो त्रिवेणी घाट में एक तरफ माँ गंगा के सुन्दर दर्शन होते हैं, दूसरी और भगवान शिव की मन भावक मूर्ती जिसमे जटा से माँ गंगा के दर्शन भी अविश्मरणीय है। श्री हरी कृष्ण जी अर्जुन को गीता के पाठ देते हुए रथ के ऊपर वाली मूर्ती भी त्रिवेणी घाट की सुंदरता में चार चाँद लगाने का काम करती हैं। ऋषिकेश में आने पर सबसे पहले गंगा दर्शन हेतु और स्नान करने के लिए त्रिवेणी घात की श्रद्धालुओं का पहला गंतव्य होता हैं।

ऋषि कुंड

Rishikund Rishikesh

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ऋषि गालिब के तपोपरांत सूर्य देव ने ऋषि गालिब को दर्शन दिए और हमेसा के लिए माँ यमुना को यहाँ प्रकट किया। यह एक मात्र कुंड है जिसका पानी किसी भी मौषम में मैला नहीं होता। हर मौषम में साफ सुन्दर दिखाई पड़ता हैं। इसके अलावा शाम की भव्य गंगा आरती के दर्शन के लिए भी स्थानीय लोगो सैलानियों की भीड़ लग जाती हैं।

 

भरत मन्दिर

योग नगरी ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट में ही एक और दर्शनीय मंदिर है नाम है भरत मंदिर, जिसकी अपनी ही एक अलग कहानी है। भरत मंदिर ऋषिकेश का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है जो भगवान राम के छोटे भाई भरत जी का है, 12वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने बनवाया था।

लक्ष्मण झूला

लक्ष्मण झूला माँ गंगा के दो किनारों को जोड़ने के साथ-साथ टिहरी और पौड़ी गढ़वाल दो जिलों को जोड़ने का भी काम करता है। इस पुल का नाम लक्ष्मण झूला इस लिए पड़ा क्योकि यही से श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण ने जूट की रस्सी के सहारे गंगा नदी को पार किया था। नदी के पश्चमी भाग में लक्ष्मण जी मंदिर भी स्तिथ है। लक्ष्मण झूला का निर्माण ब्रिटिश शासन काल सन 1930 हुआ सुरु में इसे जूट की रस्सी से बनाया गया बाद में इसे लोहे की रस्सी से मजबूती दी गई। 450 फ़ीट लम्बे इस पुल से माँ गंगा और आसपास के सुन्दर नज़ारे का आनंद लेने के लिए हर मौसम में देश विदेश के सैलानियों का ताँता लगा रहता है। लक्ष्मण झूला भी एक कारण बनता है जो सैलानियों के मन में Rishikesh Trip की इच्छा तीब्र करता है।

राम झूला

राम झूला ऋषिकेश मुनिकीरेती से लग-भग 3 किमी की दूरी पर लक्ष्मण झूला से पहले है, जो स्वर्गाश्रम को शिवानंद आश्रम से जोड़ता है। राम झूला की कोई खास कहानी नहीं है, इसे लक्ष्मण झूला से प्रेरित होके उत्तरप्रदेश सरकार ने 1983 में बनवाया था। उत्तरप्रदेश सरकार ने इसलिए क्योकि तब तक उत्तरखण्ड उत्तरप्रदेश से अलग नहीं हुआ था। यह पुल (राम झूला) लक्ष्मण झूला से भी बड़ा है। इस पुल में पैदल यात्रियों के साथ-साथ दो पहिया वाहनों के जाने की भी अनुमति है। इसमें चलते हुए माँ गंगा का और ऋषिकेश का मनमोहक दर्शन का आनंद इसमें चलने पर ही अनुभव किया जा सकता इसे शब्दों में बयां करना थोड़ा मुश्किल है।

परमार्थ निकेतन

परमार्थ निकेतन स्वामी विशुद्धानन्द द्वारा स्थापित ऋषिकेश का सबसे पुराना आश्रम है। स्वामी विशुद्धानन्द जी को “काली कमली वाली” नाम से भी जाना जाता है। यहाँ बहुत सुन्दर मंदिर स्थापित हैं। यहाँ एक से बढ़कर एक शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं। आश्रम के आसपास ही हस्तशिल्प के सामान से भरी कई दुकाने भी आकर्षण के केंद्र बानी हुई हैं।

नील कंठ महादेव मंदिर

नील कंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश के प्राचीन मंदिर में एक है जैसे की नाम से ही प्रतीत होता है यह मंदिर भगवन शिव को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन से निकला विष भगवन शिव ने यहीं आकर ग्रहण किया था। समुद्र तल से 5500 फ़ीट की ऊंचाई पे स्थित भगवन नील कंठ महादेव मंदिर के पास ही एक अत्यंत सुन्दर झरना भी बहता है, जहाँ श्रद्धालु स्नान करते हैं मंदिर के दर्शन से पहले।

त्रियंबकेश्वर मंदिर

त्रियंबकेश्वर मंदिर ऋषिकेश में मशहूर लक्ष्मण झूला पार करते ही दर्शन देता है। यह मंदिर ऋषिकेश का प्रशिद्ध 13 मंजिला मंदिर है जहाँ हर मंजिल पर अलग अलग देवी देवताओं की मूर्तियां बिराजमान हैं। जो की श्रद्धालुओं को प्रेरित करता है 13 मंजिला मंदिर में भीड़ बढ़ने के लिए।

13 मंजिला इस इस भव्य मंदिर को ऋषिकेश के ही बाबा कैलाशानंद जी ने बनवाया था। इस 13 मंजिल ईमारत में मंदिर के साथ साथ कई छोटी छोटी दुकाने भी मौजूद हैं जाना पर रुद्राक्ष, रत्नो से जड़ी अँगूठिया और भगवन की मूर्तियां मिल जाती हैं।

ऋषिकेश में बंजी जम्पिंग

ऋषिकेश में स्थित मोहन चट्टी में भारत की सबसे ऊँची बंजी जंपिंग का स्पॉट है। जमीन से लगभग 83 मीटर ऊंचाई वाला बंजी जंपिंग ये स्टेशन भारत के नहीं समूचे विश्व के रोमांच पसंद लोगो के लिए आकर्षक का केंद्र है। यहाँ एक बंजी जंपिंग का चार्ज 3500-4000 रुपय के आस पास रहता है।

 

यह थी संक्षिप्त जानकारी योग नगरी ऋषिकेश के बारे में, उम्मीद है आपको जानकारी पसंद आई होगी। अगर आप इस पोस्ट में कुछ जोड़ना या करेक्शन चाहते हैं तो आप हमे कमेंट में बता सकते हैं या फिर हमे मेल कर के पूरी जानकारी दे सकते हैं। अगर आप उत्तरखण्ड से हैं तो प्लीज अपने ग्रुप्स में इस पोस्ट को शेयर कर के अपने उत्तरखण्ड के टूरिज्म को बढ़ावा देने में हमारी मदद करें, धन्यवाद। उत्तराखंड की और भी मजेदार टूरिस्ट प्लेसेस के लिए ओर भी पोस्ट विजिट कर सकते हैं।

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हेलो, मेरा नाम सूर्य जोशी है, मै उत्तराखण्ड के टिहरी जिले का रहने वाला हूँ। मैंने अपनी ग्रेजुएशन हेमन्ती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी से पूरी की है, और मै मारुती सुजुकी में पिछले 7 साल से Sales में बतौर Relationship Manager काम कर रहा हूँ। पिछले 2 साल से पार्ट टाइम Blogging कर रहा हूँ।

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