Panch Prayag In Uttarakhand | पंच प्रयाग उत्तराखण्ड

जहाँ पर दो नदी मिलकर एक हो जाती है उसे नदियों का संगम कहा जाता है। सनातन धर्म में नदियों के संगम को बहुत ही पवित्र माना जाता है, इसी संगम स्थल को प्रयाग का नाम दिया गया है। उत्तराखण्ड में ५ मुख्य नदियों का संगम होता है इन्ही को पंच प्रयाग का नाम दिया गया है। गंगा के उद्गम स्थल में भी काफी मतभेद पाए जाते हैं कुछ लोगों का मानना है गंगा बद्रीनाथ से निकलती है वहीँ कुछ लोग इसका उद्गम स्थल गंगोत्री स्थित गौमुख मानते हैं, इसके बारे में मेरी तरफ से कोई भी दावा नहीं किया जा सकता किन्तु इस पोस्ट को पूरा पढ़ने के बाद आप खुद इसके निष्कर्ष तक पहुँच सकते हैं।

उत्तराखण्ड में कुल 5 प्रयाग हैं जिन्हे विष्णुप्रयाग , नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग, आदि नामों से जाना जाता है। देवी के रूप में पूजे जानी वाली गंगा का उद्गम स्थल उत्तराखण्ड स्थित है, और इसी गंगा की सहायक नदियों के संगम को बड़े तीर्थ स्थल के रूप पूजा जाता है और नाम दिया गया प्रयाग का।

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1)  विष्णुप्रयाग

Panch Prayag In Uttarakhand
विष्णु गंगा और धौली गंगा के संगम को विष्णुप्रयाग कहा गया है। बद्रीनाथ स्थित संतोपत हिमानी नामक ग्लेशियर से निकली नदी कहलाती है विष्णु गंगा और दूसरी तरफ से आयी नदी धौली गंगा के संगम को कहा गया है, धौली गंगा वही नदी है जिसमे ग्लेशियर के अचानक फटने की वजह से भारी बाढ़ के चलते ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट और तपोवन वाले डैम में भारी जान माल का नुकसान हुआ यह घटना फरबरी 2021 में हुई।  विष्णुप्रयाग दोनों नदी के बराबर बहाव के कारण इस नदी को यहाँ पर नया नाम मिल जाता है अलकनंदा। विष्णुप्रयाग में विष्णु जी का मंदिर जहाँ भगवान विष्णु जी की मूर्ति स्थापित है, और विष्णुकुण्ड बिराजमान भी है जिसके दर्शन से पुंड्या प्राप्त होता है।
जोशीमठ-बद्रीनाथ मोटर मार्ग में स्थित विष्णुप्रयाग पर्यटन के लिहाज से दर्शनीय है। नदी का बहाव तेज होने के कारण यहाँ स्नान करना मुश्किल झरूर है, पर प्राकृतिक सुंदरता आपका मन मोह लेगी। नदी के कलकल के साथ साथ घने जंगलों की सुंदरता विष्णुप्रयाग की सुंदरता पे चार चाँद लगाने का काम करती है। ट्रैकिंग और रॉक क्लाइबिंग के रोमांचक अनुभव के लिए लोग यहाँ अधिकतर जाते हैं। यह ऋषिकेश से लगभग 270 -275  किमी दूर है। यहाँ के लिए ऋषिकेश से बस अथवा ट्रैकर आसानी से मिल जाते हैं।

2) नंदप्रयाग

Panch Prayag In Uttarakhand

नंदाकिनी और अलकनंदा के संगम स्थल को नंदप्रयाग के नाम से जाना जाता है। विष्णुप्रयाग से निकली अलकनंदा जब नंदाकिनी से मिलती है तो अलकनंदा का बहाव नंदाकिनी से तेज़ है, और भूगोलिक नियम के अनुसार भी जब काम भहाव वाली कोई नदी किसी तेज़ भहाव वाली नदी से मिलती है तो कम भहाव वाली नदी अपना अस्तित्व वहीँ खो देती है।  इसीलिए NAND PRAYAG से नदी का नाम अलकनंदा ही कहलाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार नन्द महाराज ने भगवान विष्णु की तपस्या यहीं पर की थी, भगवान को अपने पुत्र के रूप में जन्म लेने के लिए। इस पावन धर्म स्थल पर भगवान भोले नाथ के मंदिर के साथ-साथ माता नंदा देवी का भी मंदिर प्रशिद्ध है। यहाँ हर नवरात्री में एक बड़े मेले का भी आयोजन किया जाता है, जिसमे काफी श्रद्धालु और मेले का मजा लेने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ काफी मात्रा में सैलानी भी आते हैं।

प्राकृतिक सुंदरता के प्रेमी यहाँ आकर अवस्य की आनंद उठाना चाहेंगे। NAND PRAYAG में अलकनंदा के दोनों तरफ घने जंगल और पहाड़ मन मोह देने वाले दृश्य देते हैं, इसीलिए TRACKING और CAMPING के लिए भी यहाँ बड़े बड़े शौकीन लोग आते हैं। ऋषिकेश से नन्द प्रयाग की लग भाग दूरी 190 -195 किमी की है। यह बद्रीनाथ जोशीमठ मोटर मार्ग में पड़ता है इसलिए यहाँ के लिए भी बस या ट्रैकर ऋषिकेश से आसानी से मिल जाते हैं।

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3) कर्णप्रयाग

Panch Prayag In Uttarakhand

पिंडर नदी और अलकनंदा के संगम स्थल को कर्णप्रयाग कहते हैं। यहाँ भी अलकनंदा की गहराई अथवा बहाव तेज़ होने के कारण इससे आगे भी इस नदी को अलकनंदा के नाम से जाना जाता है। पिंडर नदी बागेश्वर में स्थित पिंडारी ग्लेशियर से निकल कर देवभूमि के खूबसूरत स्थान कर्णप्रयाग में आकर अलकनंदा से मिलती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार कुन्ती पुत्र कर्ण ने यहीं पर सूर्य देव की तपस्या की थी जिसेक कारण इस जगह के नाम कर्णप्रयाग पड़ा। महान दानवीर कर्ण के कारण ही इस जगह पूजा करने के पश्चात् यहाँ दान देने की प्रथा है।

कर्णप्रयाग एक धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ एक अच्छा टूरिस्ट प्लेस भी है, जहाँ दुनिया भर से सैलानियों की भीड़ हर मौसम बानी रहती है। यह एक रिवर राफ्टिंग के लिए अच्छा डेस्टिनेशन है। तीर्थ स्थल में आस्था रखने वाले देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग के साथ-साथ कर्णप्रयाग भी अवश्य जाते हैं। ऋषिकेश से लगभग 170  किमी दूर कर्णप्रयाग के लिए भी बस और ट्रैकर ऋषिकेश से ही आसानी से मिल जाते हैं, बद्रीनाथ यहाँ से महज 127  किमी दूर है।

4) रुद्रप्रयाग

Panch Prayag In Uttarakhand

मन्दाकिनी और अलकनंदा के संगम स्थल को रुद्रप्रयाग कहा जाता है। रुद्रप्रयाग में केदारनाथ से निकली मन्दाकिनी अलकनंदा से जब मिलती है तो यहाँ भी अलकनंदा भारी पड़ती है मन्दाकिनी पे जिसके कारण इससे आगे भी इस नदी को अलकनंदा के नाम से ही जाना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव का रूद्र रूप यहीं पर अवतरित हुआ जिसके कारण इस जगह का नाम रुद्रप्रयाग पड़ा। यहीं पर भगवान शिव शंकर का रुद्रेश्वर नामक लिंग हैं, जिसके दर्शन अति पुण्यदायी माना जाता है। इसी जगह से भगवान श्री बद्री विशाल और केदार नाथ के लिए रास्ता अलग अलग होता है।

पर्यटन की दृष्टि से भी रुद्रप्रयाग काफी प्रचलित है। प्राकृतिक सुंदरता के साथ साथ टूरिस्ट पहाड़ी ट्रैकिंग का आनंद लेने हेतु भी यहाँ अक्सर आते हैं। अलकनंदा-मन्दाकिनी के संगम स्थल रुद्रप्रयाग में मौजूद रुद्रनाथ मंदिर में श्याम की आरती भी कोई दार्शनिक अनुभव झरूर करना चाहेगा, क्योंकि उस समय अलग ही दैवीय शक्ति का अनुभव होता है। ऋषिकेश से 140  किमी दूर Rudrapryag के लिए भी आसानी से गाड़ियां ऋषिकेश और हरिद्वार दोनों जगह से ही मिल जाती है। इसके अलावा यहाँ होटल्स-लॉज के अलावा अच्छे अच्छे रेस्ट्रॉन्ट भी मिल जाते हैं।

5) देवप्रयाग

Panch Prayag In Uttarakhand

अलकनंदा और भागीरथी के संगम स्थल को देवप्रयाग कहा जाता है। गंगोत्री स्थित गौमुख से निकली भागीरथी नदी में टिहरी में घनसाली से आयी भिलंगना मिलती है। टिहरी में इन्ही दो नदी भागीरथी-भिलंगना के संगम पर ही विश्व प्रशिद्ध डैम टिहरी डैम बना है। डैम से निकल कर जहाँ भागीरथी नदी अलकनंदा से मिलती है, वही कहलाता है देवप्रयाग

 DEVPRAYAG में दोनों नदी का बहाव सामान होने के कारण इसको नया नाम मिल जाता है, जिसे गंगा नाम से पूरे भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया जानती है। यहीं पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है की गंगा का उद्गम स्थल कौन सा माना जाय। बद्रीनाथ से निकली विष्णुगंगा जहाँ से निकलती है या भागीरथी के उद्गम स्थल गौमुख ? वैसे दूसरी पौराणिक कथा की माने तो राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए पहले भगवान ब्रम्हा की तपश्या कर उनके कमंडल में मौजूद माँ गंगा की धरती पे आगमन की मांग की और फिर भगवान शिव की आराधना की कि वो अपने सिर पर गंगा को जगह दें और हलके बहाव से पृथ्वी लोक पर छोड़ें। भगीरथ के अथक प्रयाश के कारण ही गंगा को भागीरथी के नाम से जाना जाता है।

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हेलो, मेरा नाम सूर्य जोशी है, मै उत्तराखण्ड के टिहरी जिले का रहने वाला हूँ। मैंने अपनी ग्रेजुएशन हेमन्ती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी से पूरी की है, और मै मारुती सुजुकी में पिछले 7 साल से Sales में बतौर Relationship Manager काम कर रहा हूँ। पिछले 2 साल से पार्ट टाइम Blogging कर रहा हूँ।

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